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Rouf dance of Jammu and Kashmir

Rouf dance of Jammu and Kashmir

Rouf dance is a traditional and rhythmic dance of Jammu and Kashmir. This dance is performed by women. There are a number of traditional dance forms that have developed and flourished in the province of Jammu and Kashmir. This is a spring dance. wearing colorful clothes. This dance is performed during the time of Eid and Ramzan.

In this beautiful dance, the women usually line up face to face in this dance. One of the foremost notable features of their complicated footwork throughout the dance is called Chakri within the native language.

The dance is performed in mysterious poetry and the dancers dance to the rhythm of the poem. The popularity of this beautiful dance in Jammu and Kashmir can be traced. In fact that this dance came into play in the famous movie “Mission Kashmir”.

The Origin of Rouf Dance

The dance started several years ago to celebrate the beautiful weather of the spring season and for the purpose of entertaining at various festivals such as Id-ul-Fitr. Rouf Dance is a simple but fun traditional dance. It originated within the Muslim community of Jammu and Kashmir. Gradually, it was embraced by the entire community of the valley.

It’s so good that guests can’t take their eyes off the performance. Everyone enjoys immersion in its charisma and the beautiful song of the beautiful valley. Rouf dance is associated with the joy of harvest. Harvest time is a special time for farmers, with women celebrating the event by dancing with one voice. Harvest time brings a smile to the faces of farmers. And they often celebrate the event in the most beautiful way. There is delicious food, songs, and dances that are considered special.

Rauf Dance Performance

Rouf dance is one of the largest traditional dances performed by Kashmir women who are members of the Muslim community. Kashmir is one of the largest tourist destinations in the world, and millions of tourists visit this valley every year. Its spring and therefore the valleys of Kashmir are filled with colorful flowers, and therefore the hearts of the folks of Kashmiri are crammed with joy.

They celebrate the arrival of spring by coming together and playing Rouf dance. The women make two chains for the dancers face to face. As the music of the poems begins, they begin to sway back and forth gracefully. All magic is done by walking and torso movements. The two lines interact while dancing and enjoying rhythmic poems.

A peaceful atmosphere is created when women make a Rouf and embrace spring. This dance form has gained a lot of recognition nationally and internationally. If you are lucky you can catch a Rouf dance performance during Eid.

Rouf dance costume

The women wear the Salwar Kameez covered with embroidered Pheran. Adding beauty to their outfits is a scarf called Kasaab or Daejj. They wear ancient silver jewelry to enhance the design.

Music and instruments

The rouf music sung by Kashmiri ladies at totally different times shows different themes like welcome songs, joy-happiness, sorrow, spring songs, etc. It is a musical symbol of gratitude for bringing spring joy to the valleys of Kashmir. There is no accompaniment to the music used with rouf songs as sung during daily activities. But when performing on a stage or in an informal setting, traditional instruments such as Noet, Tumbakhnari, Rabab, etc. are used. In the case of stage plays, traditional musical instruments such as Rabab are played in the background.

In that informal meeting, only a few musicians are required to accompany the humorous folk dance. Its modern popularity in Kashmir has led to the use of new musical instruments and a sample of electronic audio. At this time Current Artists in Jammu and Kashmir make a variety of Kashmiri music albums, folk albums and offer many special effects in Rouf.

 Rouf dance in Hindi

जम्मू और कश्मीर का राउफ नृत्य

राउफ नृत्य जम्मू और कश्मीर का एक पारंपरिक और लयबद्ध लोक नृत्य है। यह नृत्य महिला समुदाय द्वारा किया जाता है। कई लोक नृत्य रूप हैं जो विशेष रूप से जम्मू और कश्मीर राज्य में उत्पन्न और विकसित हुए हैं। यह वसंत ऋतु का नृत्य है। रंग बिरंगे परिधान पहने हुए। यह नृत्य ईद और रमजान के अवसरों के दौरान किया जाता है।

इस खूबसूरत नृत्य में महिलाएं आम तौर पर इस नृत्य में आमने सामने होती हैं। सबसे उल्लेखनीय विशेषताओं में से एक नृत्य के दौरान उनका जटिल फुटवर्क है जिसे स्थानीय भाषा में चक्री कहा जाता है।

इस नृत्य का अभ्यास रहस्यमय कविता के साथ किया जाता है और नर्तक कविता की लय के साथ नृत्य करते हैं। जम्मू और कश्मीर में इस लोक नृत्य की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस नृत्य शैली ने प्रसिद्ध फिल्म “मिशन कश्मीर” में अपनी जगह बनाई।

राउफ नृत्य की उत्पत्ति

यह नृत्य कई साल पहले वसंत ऋतु के अच्छे मौसम का जश्न मनाने के लिए और ईद-उल-फितर जैसे विभिन्न त्योहारों में आनंद के उद्देश्य से उत्पन्न हुआ था। राउफ नृत्य एक सरल लेकिन हंसमुख लोक नृत्य है। इसकी उत्पत्ति कश्मीर के मुस्लिम समुदाय में हुई थी। धीरे-धीरे इसे घाटी के हर समुदाय ने अपनाया।

यह इतना सुंदर है कि आगंतुक प्रदर्शन से अपनी नजरें नहीं हटा सकते। हर कोई इसके करिश्मे में सराबोर और खूबसूरत घाटी की आनंदमयी धुन का लुत्फ उठाता है। रौफ नृत्य को फसल कटाई की खुशी के साथ भी जोड़ा जाता है। फसल कटाई का मौसम किसानों के लिए एक विशेष अवसर होता है, महिलाएं इस अवसर को एक स्वर में नृत्य करके मनाती हैं। कटाई का मौसम किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाता है और वे आमतौर पर इस अवसर को बहुत भव्य तरीके से मनाते हैं। अच्छा भोजन, गीत और नृत्य हैं जो एक विशेष तरीके से देखे जा रहे हैं।

राउफ नृत्य प्रदर्शन

राउफ नृत्य प्रमुख लोक नृत्यों में से एक है जिसे मुस्लिम समुदाय से संबंधित कश्मीर की महिलाओं द्वारा प्रदर्शित किया जा रहा है। कश्मीर दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और हर साल लाखों पर्यटक घाटी में आते हैं। इसके झरने और कश्मीर की घाटियाँ रंग-बिरंगे फूलों से सराबोर हैं, और कश्मीरी लोगों के दिल खुशी से भर जाते हैं।

वे एक साथ इकट्ठा होकर और रौफ नृत्य कर वसंत के आगमन का जश्न मना रहे हैं। महिलाएं एक दूसरे के सामने नर्तकियों की दो श्रृंखलाएं बनाती हैं। काव्य-संगीत शुरू होते ही वे शान से आगे-पीछे झूलने लगते हैं। सारा जादू फुटवर्क और धड़ आंदोलन द्वारा किया जाता है। नृत्य करते समय दो पंक्तियाँ परस्पर क्रिया करती हैं और लयबद्ध कविता का आनंद लेती हैं।

एक शांतिपूर्ण माहौल बनाया जाता है जब महिलाएं रौफ प्रदर्शन करती हैं और वसंत का स्वागत करती हैं। इस नृत्य रूप ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत प्रशंसा अर्जित की है। यदि आप भाग्यशाली हैं तो आप ईद के दौरान भी रौफ नृत्य का प्रदर्शन देख सकते हैं।

राउफ नृत्य की पोशाक

महिलाएं सलवार कमीज पहनती हैं जो एक कढ़ाई वाले फेरन से ढकी होती है। उनकी पोशाक में सुंदरता जोड़ने के लिए कसाब या दाएज नामक एक हेडस्कार्फ़ है। लुक को बढ़ाने के लिए वे पारंपरिक चांदी के गहने पहनते हैं

संगीत और उपकरण

कश्मीरी महिलाओं द्वारा विभिन्न अवसरों पर गाए जाने वाले रौफ में विभिन्न विषयों जैसे खुशी, खुशी, दुख, स्वागत गीत, वसंत गीत आदि को दर्शाया गया है। यह कश्मीर की घाटियों में वसंत की खुशी लाने के लिए कृतज्ञता का एक संगीतमय संकेत है। रौफ गीतों के साथ किसी भी संगीत संगत का उपयोग नहीं किया जाता है क्योंकि इसे दैनिक गतिविधियों के दौरान गाया जाता है। लेकिन मंच पर या अनौपचारिक सभा में प्रदर्शन करते समय नोएट, तुमबखनारी, रबाब आदि लोक वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता है। मंच प्रदर्शन के मामले में, पारंपरिक वाद्ययंत्र जैसे रबाब को पृष्ठभूमि में बजाया जाता है।

ऐसी अनौपचारिक सभा में मनोरंजक लोक नृत्य के साथ केवल कुछ गायकों की आवश्यकता होती है। कश्मीर में इसकी आधुनिक लोकप्रियता ने नए संगीत वाद्ययंत्रों और इलेक्ट्रॉनिक ध्वनि नमूने के उपयोग को प्रेरित किया है। कश्मीर में वर्तमान कलाकार विभिन्न प्रकार के कश्मीरी संगीत एल्बम बनाते हैं और रौफ में कई विशेष प्रभाव प्रदान करते हैं।

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