Menu Close

Indian classical dances- 8 classical dances of india in hindi

Indian classical dance

Indian classical dance is a very old art, the source of which lies in the Natya Veda. Based on the same, Bharata has explained the dance in detail in ‘Natyashastra’. Singing, playing and dancing are natural movements of the cheerful mind, which are found in animals, birds, insects, kites, demons, and humans. When a system is given to natural verbs, it is called ‘Kala’. Nature also follows that arrangement, as blossoming flowers have a certain shape, color, and certain smell.

It is never possible that rose flowers or jasmine rose from the flowers of jasmine or mangoes or bananas can be planted on papaya tree. Behind all this, there is such a power of pulsation, which does not allow any interference in its rhythm, because an order is a life and the catastrophe is a catastrophe. Influenced by this divine power, the whole creation is becoming balanced.

 Indian-classical-dance

When the sensations of happiness and sorrow arise in the mind and resonate in the form of songs, they are called by different names and given the name of some melody or tune. Similarly, when the senses are expressed by the gestures, they are given the names of various postures and eunuchs. The song and dance have been created in this way.

Music & dance

India has a very rich culture of dance and music, traditional, classical, folk, and tribal dance styles. These incredible traditional dances of India have their origins during ancient times and are considered to be the mother art of classical dances. Bharatanatyam in the classical dance of India is considered to be the oldest form of classical dance in the country and the most popular classical dance in India and is included ancient in the Natya Shastra.

In the different provinces of India, some new styles were born by mixing elements of classical as well as elements of folk elements based on classical and based on that, the most popular dance forms in folk were Indian classical dances. Popular among them are Bharatanatyam, Odissi, Mohiniattam, Kathakali, Manipuri, and Kathak. Inscriptions on dance in India, genealogy of kings and artists, literary sources, sculpture, and painting of various periods, extensive on dance Provide evidence.

Contemporary classical dance forms have evolved from musical plays or musical dramas, performed from the 12th century to the 19th century. Indian classical dances have two basic aspects that is tandava (tempo and rhythm) and lasya (grace, gesture, and rasa).

The Indian classical dance three main components are-

Theatrical

Nritya (dance activities in their original form)

Nritya (expressive component ie mudra or gesture).

There are nine Ras: –

Shringar: Love

Haasay: Humorous

Karuna: Grief

Raudra: Rage

Veer: Valor

Bhayanak: Fear

Vibhats: Hatred

Adbhut: Surprise.

8 Classical dances of  India

The Natya Shastra written by Bharata Muni is the most prominent source for Indian aesthetics to establish the characteristics of dances. Refers to the ancient Indian scripture-based performing arts. Classical dance has its origins in the Natya Shastra. According to sources and scholars, there are 8 classical dance forms in India.

Bharatanatyam – from Tamil Nadu

Kathak – from Uttar Pradesh

Kathakali – from Kerala

Kuchipudi – Andhra Pradesh

Odissi – from Odisha

Sattriya – from Assam

Manipur – from Manipur

Mohiniyattam – from Kerala

The cultural ministry of India has also included Chhau in the list of classical dances, which together consist of a total of 9 Indian classical dances.

Indian classical dance in Hindi (भारतीय शास्त्रीयनृत्य)

भारतीय नृत्यकला अत्यन्त पुरानी कला है, जिसका स्रोत नाट्य वेद में निहित है। उसी के आधार पर भरत ने ‘नाट्यशास्त्र’ में नृत्यकला को विस्तार से समझाया है। गाना, बजाना और नाचना प्रफुल्लित मन की स्वाभाविक क्रियाएँ हैं जो पशु-पक्षी, कीट-पतंग, देव-दानव और मनुष्य सभी में पाई जाती हैं। स्वाभाविक क्रियाओं को जब कोई व्यवस्था दी जाती है, तो उसे ‘कला’ कहते हैं। प्रकृति भी उस व्यवस्था का पालन करती है, जैसे खिले हुए पुष्पों का एक निश्चित आकार, रंग और निश्चित गन्ध होती है।

यह कभी सम्भव नहीं कि चमेली के खिले हुए फूलों से गेंदा या गुलाब की गन्ध आ जाए या पपीते के वृक्ष पर आम या केले लग जाएँ। इस सबके पीछे स्पन्दन की कोई ऐसी शक्ति अवश्य कार्य करती है, जो अपनी लय में कोई व्यतिक्रम नहीं होने देती, क्योंकि क्रम ही जीवन है और व्यतिक्रम प्रलय। इस दिव्य शक्ति से प्रभावित होकर पूरी सृष्टि सन्तुलित हो रही है।

मन में उठे सुख और दुःख की अनुभूतियाँ जब गीत बनकर गूंजने लगती हैं, तो उन्हीं को विभिन्न नामों से पुकार कर किसी न किसी राग या धुन का नाम दे दिया जाता है। ठीक इसी प्रकार जब चेष्टाओं द्वारा अनुभूतियाँ व्यक्त होती हैं, तो उन्हें विविध मुद्राओं और अंगहारों का नाम दे दिया जाता है।गीत और नृत्य की सृष्टि इसी प्रकार हुई है।

नृत्य और संगीत

भारत में नृत्य और संगीत की बहुत समृद्ध संस्कृति है, पारंपरिक, शास्त्रीय, लोक और जनजातीय नृत्य शैली हैं। भारत के इन अतुल्य पारंपरिक नृत्यों की उत्पत्ति प्राचीन काल के दौरान हुई है और इन्हें शास्त्रीय नृत्यों की मातृ कला माना जाता है। भारत के शास्त्रीय नृत्य में भरतनाट्यम, देश में शास्त्रीय नृत्य का सबसे पुराना रूप और भारत में सबसे लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य माना गया हैं और इसे नाट्य शास्त्र में प्राचीन शामिल किया गया है।

 Indian-classical-dances

भारत के अलग-अलग प्रान्तों में शास्त्रीय आधार पर जिन तत्त्वों को ग्रहण किया गया, उनमें शास्त्रीयता के साथ-साथ लोक तत्वों तत्त्वों के मिश्रण से कुछ नई शैलियों का जन्म हुआ और उसी के आधार पर लोक में सर्वाधिक प्रचलित नृत्य-विधाएँ भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के नाम से जानी जाने लगीं, जिनमें-भरतनाट्यम्, ओडिसी या उड़ीसी, मोहिनीअट्टम्, कथकलि, मणिपुरी और कथक प्रमुख हैं।भारत में नृत्य पर शिलालेख, राजाओं और कलाकारों की वंशावली, साहित्यिक स्रोत, मूर्तिकला और विभिन्न अवधियों की पेंटिंग, नृत्य पर व्यापक प्रमाण प्रदान करते हैं।

समकालीन शास्त्रीय नृत्य रूप 12 वीं शताब्दी से 19 वीं शताब्दी तक किए गए संगीत नाटक या संगीत-नाटक से विकसित हुए हैं।भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के दो मूल पहलू हैं – तांडव (गति और लय) और लास्य (कृपा, भाव और रस)।

तीन मुख्य घटक हैं-

नाट्य (नृत्य का नाटकीय तत्व यानी पात्रों की नकल)

नृ्त्य (उनके मूल रूप में नृत्य की गतिविधियाँ)

नृत्या (अभिव्यंजक घटक यानी मुद्रा या हावभाव)।

नौ रस हैं :-

शृंगार : प्रेम

हास्य : विनोदी

करुणा : दु: ख

रौद्र : क्रोध

वीर : वीरता

भयानक : भय

बिभत्स : घृणा

अदबूत : आश्चर्य।

8 भारतीय शास्त्रीय नृत्य

नृत्यों की विशेषताओं को स्थापित करने के लिए भारत मुनि द्वारा लिखित नाट्य शास्त्र भारतीय सौंदर्यशास्त्रियों के लिए सबसे प्रमुख स्रोत है। प्राचीन भारतीय शास्त्र-आधारित प्रदर्शन कलाओं को दर्शाता है। शास्त्रीय नृत्य की उत्पत्ति नाट्य शास्त्र से हुई है। स्रोत और विद्वान के अनुसार भारत में 8 शास्त्रीय नृत्य रूप हैं।

भरतनाट्यम – तमिलनाडु से

कथक – उत्तर प्रदेश से

कथकली – केरल से

कुचिपुड़ी – आंध्र प्रदेश से

ओडिसी – ओडिशा से

सत्रीया  – असम से

मणिपुरी – मणिपुर से

मोहिनीअट्टम – केरल से

भारत के सांस्कृतिक मंत्रालय ने छाऊ को भी शास्त्रीय नृत्य की सूची में शामिल किया है जिसे मिलाकर कुल 9 शास्त्रीय नृत्य होते है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published.