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Gharanas of kathak Dance – Kathak Nritya Ke Gharane in hindi

Gharanas of Kathak Dance

First of all, We will know the Gharanas and how many Gharanas are there in Kathak dance form. Gharanas have come from the Kathak Dancers (Nrityakars) of ancient times. In ancient times, dancers were banned from dancing so that means there is no income source 

Many dancers pushed into prostitution. That is the time when the history of Kathak dance tradition nothing was written or recorded, Nothing was preserved or archived. These natch women have an amazing contribution to preserving the artwork. Then they began studying from dwelling to protect Kathak. 

They started learning from home to preserve Kathak, and many of their children or cousins ​​learned to dance from them.

And started learning from the local Gharanas or local people as they call it Gharana,

                 “The meaning of the word Gharana came from home (ghar).”

Traditions of different courts and courts were permanent dancers. They created their Gharanas and formed the stages of the three gharanas, which is part of northern India,

These gharanas of Kathak dance are:-

  • Jaipur Gharana
  • Lucknow Gharana
  • Banaras Gharana

Gharanas-of-kathak-Dance-Kathak-Nritya-Ke-Gharane-in-hindi

Jaipur Gharana

The Jaipur Gharana dance comes from the Rajasthani tradition as being on India’s northern border, and the actions were more focused on the warrior-like movements. That’s why there was a lot of enthusiasm and enthusiasm in their dances. In this, Gharana introduced the concepts of Paran and Kavity. Aggressive action was a part of his Gharana, with an excess of (footwork) tatkaar and chakkars (spins). It was the specialty of Jaipur Gharana.

Lucknow Gharana

Lucknow Gharana of Uttar Pradesh is the main Gharana of Kathak. This Gharana shows the maximization of Ang (organs), Bhav (Facial expressions), and Gatnikas (the beauty of the last exit). The small pieces of toda tukda are dance in it.

The Lucknow Gharana was developed in Lucknow within the courts of Nawab of awad, which was based on Pandit Ishwari Prasad. It notably gives significance to grace, magnificence, and pure expressions throughout the dance. It handled the minute delicate actions, the ethos, the romance, the shringar, all that was developed in the Lucknow Gharana of Kathak dance. Great legends like Pandit Shambhu Maharaj, pandit Lachhu Maharaj, pandit Birju Maharaj are related to this Gharana.

Banaras Gharana

Banaras Gharana, also known as Janki Prasad Gharana, speaks of pure dance in this Gharana and the beauty of Satvik Bhav and Tatkaar in it. The Banaras Gharana was developed by being on the banks of the Ganges river. There was something based on Thumri Joe’s “Bol Bella” that tells us the specialty of that particular family.

The three gharanas were not isolated but still had their style and created their repertoire through the guru-Shishya tradition from one generation to other generations.

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Kathak Nritya ke Gharane in hindi / कत्थक नृत्य के घराने

नमस्कार सबसे पहले हम जानेगे की घराने होते क्या है और कथक नृत्य में कितने घराने होते है। घराने प्राचीन काल के कथक नृत्यकरो से आये है। प्राचीन समय में, नर्तकियों को नृत्य करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था, इसका मतलब है कि आय का कोई स्रोत नहीं है कई नर्तकियों को वेश्यावृत्ति में धकेल दिया गया। वह समय है जब कथक नृत्य परंपरा का इतिहास कुछ भी लिखा या दर्ज नहीं किया गया था, कुछ भी संरक्षित या संग्रहीत नहीं किया गया था।
तब उन्होंने कथक को संरक्षित करने के लिए उन्होंने घर से ही सीखना शुरू किया और उनके खुद के कई बच्चे या चचेरे भाई उनसे नृत्य सीख रहे थे और स्थानीय घरानों या स्थानीय लोगों को सीखना शुरू किया इसलिए इन्हे घरान कहते है।
“घरान शब्द का अर्थ ही घर से आया है”
अलग अलग दरबारों और न्यायालयो के परंपरा स्थायी नृतक थे उन्होंने अपने अपने घरानो की रचना की और इस प्रकार भारत के उत्तरी भाग में विकसित होने वाले तीन घरानो के चरण बने,जिनके नाम थे
  • जयपुर घराना
  • लखनऊ घराना
  • बनारस घराना

जयपुर घराना

जयपुर घराने का नृत्य राजस्थानी परम्परा से आया है क्युकी भारत के उत्तरी सीमा में होने के कारण आंदोलनों की तरह योद्धा पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया था। इसीलिए इनके नृत्यों में तीजी तयारी व् जोश दिखाई पड़ता थ। इसमें परन के बोल और, कवित्यो की अवधारणाओं को पेश किया जाता था । आक्रामक हरकत उनके घराने का एक हिस्सा थी, जिसमें फुटवर्क और स्पिन की अधिकता थी। यह थी जयपुर घराने की ख़ासियत।

लखनऊ घराना

लखनऊ घराना कथक का प्रमुख घराना है इस घराने में अंगो व् भावो की अधिकतमता और गत निकास की खूबसूरती दिखाई पड़ती है।  इसलिए इसमें छोटे तोड़े टुकड़े नाचे जाते है

इस  घराने का विकास लखनऊ में नवाबो के दरबार के भीतर हुआ था, जो पंडित ईश्वरी प्रसाद द्वारा आधारित था। यह विशेष रूप से पूरे नृत्य में अनुग्रह, भव्यता और शुद्ध भावों को महत्व देता है। इसने मिनट की नाजुक क्रियाओं को संभाला, लोकाचार, रोमांस, शृंगार, यह सब कथक नृत्य के लखनऊ घराने में विकसित किया गया था। पंडित शंभू महाराज, पंडित लच्छू महाराज, पंडित बिरजू महाराज जैसे महान दिग्गज इस घराने से संबंधित हैं

बनारस घराना

बनारस घराना जोकि जानकी प्रसाद घराना नाम से भी प्रसिद्ध है इस घराने में शुद्ध नृत्य के बोलो और सताकिव भावो और ततकार की खूबसूरती इसमें बसी है बनारस घराना गंगा नदी के किनारे होने से आध्यात्मिकता का पहलू विकसित हुआ था। ठुमरी जो की “बोल बेला ” पर आधारित कुछ ऐसा था जो हमे उस विशेष घराने की विशेषता को बताता है।

तीन घरान, वे अलग-थलग नहीं थे, लेकिन फिर भी उनकी अपनी शैली थी और अपने स्वयं के प्रदर्शनों का निर्माण किया जो अब पीढ़ियों के लिए गुरु-शिक्षा परम्परा के माध्यम से पारित किया जा रहा था।

आज हमने इस ब्लॉग में कथक नृत्य के घराने संक्षिप्त रूप में समझा है आशा करता हूँ की आपको आपके हर प्रश्न का जवाब मिला होगा और कुछ नया सीखा होगा और अधिक जानकारी के लिए नृत्य शिक्षा से जुड़े रहे धन्यवाद।

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